पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं – कविता

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जो कक्षाओं मे नहीं पढ़ाया जाता, उस इतिहास के धूल लगे पन्ने पलट रहा हुँ मैं;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

नेहरू की ऐतिहासिक भूलो का प्रभाव पढ़ रहा हुँ मैं,
गांधीजी के कुछ गलत निर्णयों का परिणाम पढ़ रहा हुँ मैं;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

पटेल का भारत संगठन का अनोखा कार्य पढ़ रहा हुँ मैं,
अम्बेडकर का समाज सुधार को किया आंदोलन पढ़ रहा हुँ मै;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

कृष्ण की द्वारिका के पतन का कारण पढ़ रहा हुँ मैं,
ऋषि कश्यप की धरती को हो रहा विनाश पढ़ रहा हुँ मैं;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

विवेकानंद ने जो किया जो न किया, वो कार्य पढ़ रहा हूॅं मैं,
सुभाष की सेना ने जो दिखाया वो असाधारण जोश पढ़ रहा हुँ मैं;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

श्रद्धानंद का दलितों को दिया प्यार पढ़ रहा हुँ मैं,
लेखराम का पाखण्ङियो को दिया जवाब पढ़ रहा हुँ मैं;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

सृष्टि के आदि में ईश्वर ने जो दिया वो ज्ञान पढ़ रहा हुँ मैं,
दयानंद का बताया वेदों का भावार्थ पढ़ रहा हुँ मैं;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

भगत आजाद और बिसमिल को प्रेरित जिसने किया वो विचार पढ़ रहा हुँ मैं,
तिलक ने जहाँ पढ़ा ‘स्वराजय’ वो सत्यार्थ प्रकाश पढ़ रहा हुँ मैं;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

श्याम जी कृष्ण वर्मा का भुला दिया गया आजादी मे योगदान पढ़ रहा हुँ मैं,
जो कक्षाओं मे नहीं पढ़ाया जाता, उस इतिहास के धूल लगे पन्ने पलट रहा हुँ मैं;
पुनः ‘इतिहास’ पढ़ रहा हुँ मैं।

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