ऋषि मुनि गाय नहीं खाते थे – भगवान बुद्ध!

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NEW DELHI, INDIA ? JULY 1: RJD leader Raghuvansh Prasad Singh during all party pre-budget meeting on July 1, 2009 in Delhi, India. (Photo by Sipra Das/India Today Group/Getty Images)

अब इस बात में किसी प्रकार की शंका नहीं रही कि सेकुलररिज्म का अर्थ प्राचीन वैदिक सनातन धर्म का विरोध करना ही है , और जो भी व्यक्ति सत्ता प्राप्त करने के लिए हिन्दू धर्म की जितनी निंदा करेगा वह उतना ही सेकुलर माना जाएगा , ऐसा ही एक व्यक्ति रघुवंश प्रसाद है , लालू प्रसाद की पार्टी में अध्यक्ष है , इस सत्ता के लोभी दुष्टवंशी ने 10 अक्टूबर को एक ऐसा बयान दिया है , जिसका उद्देश्य हिन्दुओं को अपमानित करके मुस्लिम वोट हासिल करना है , क्योंकि मुस्लिम गौ मांस (Beef) खाते हैं . इसलिए उनको खुश करने के लिए दुष्टवंशी ने कहा ” प्राचीन काल के ऋषि ,मुनि और हिन्दू गौमांस खाते थे , यह ऐसा पहला व्यक्ति नहीं जिसने ऐसी निराधार बात कही है ,इसके पहले यूरोपियन लोगों ने संस्कृत जाने बिना वैदिक ग्रंथों में दिए गए शब्द ‘अश्वमेध , गौमेध , और नरमेध ” के गलत अर्थ करके सिद्ध करने का कुप्रयास किया की वैदिक काल में घोड़े , गाय और मनुष्य की बलि दी जाती थी , लेकिन महर्षि दयानंद ने उनकी बोलती बंद कर दी।

प्राचीन काल में ऋषि मुनि या ब्राह्मण गौ मांस नहीं खाते और न गाय का वध करते थे यह बात अगर हम वैदिक ग्रंथों से साबित करेंगे तो यह सेकुलरिज्म के अंधे हिन्दू विरोधी नहीं मानेगे , इसलिए हम लगभग 2500 साल पहले की भगवान बुद्ध की वाणी सबूत के लिए दे रहे हैं , यह बौद्ध ग्रन्थ “टिपिटक ” के सुत्त निपात से ली गयी है , इन गाथाओं में भगवान बुद्ध ने स्पष्ट शब्दों में कहा है , कि उनके पहले के लोग गाय का वध नहीं करते थे , बल्कि उनका सम्मान करते थे , इस के बारे में यह दो गाथाएं पर्याप्त हैं ,

‘उपट्ठितस्मिं यञ्‍ञस्मिं, नास्सु गावो हनिंसु ते।
यथा माता पिता भ्राता, अञ्‍ञे वापि च ञातका।
गावो नो परमा मित्ता, यासु जायन्ति ओसधा॥298
अर्थ -माता ,पिता ,भाई ,या दूसरे बंधुओं की तरह गायें भी हमारी मित्र हैं , 
जिन से (दूध )  औषधीयां बनती हैं .इसीलिए यज्ञ करने वाले लोग गौवों का वध नहीं करते थे . 
‘अन्‍नदा बलदा चेता, वण्णदा सुखदा तथा [सुखदा च ता (क॰)]।
एतमत्थवसं ञत्वा, नास्सु गावो हनिंसु ते॥299

अर्थ -गायें अन्न ,बल ,वर्ण और सुख देने वाली हैं , यह जानकर लोग गायों की हिंसा नहीं करते थे .
खुद्दक निकाय -सुत्त निपात -चूल वग्ग -4 ब्राह्मण धम्मिक सुत्तं गाथा 298 और 299
बताइये इस से अधिक प्रामाणिक गवाही किस की हो सकती है ? लोग तो बुद्ध को नास्तिक भी कह देते हैं ,अज्ञान वश लोग अनीश्वरवादी लोगों को नास्तिक कह देते हैं , लेकिन मनुस्मृति के अनुसार असली नास्तिक तो वह लोग होते हैं ,जो वेद की आज्ञा को नहीं मानते ” साधुस्सभा बहिष्कृतवान् नास्तिको वेद निन्दकः “अर्थात वेद की निंदा करने वाले नास्तिक को सभ्य लोगों की सभा से बाहर खदेड़ दो , दुष्ट वंश प्रसाद वेद का अपमान करने से घोर नास्तिक है ,

NEW DELHI, INDIA ? JULY 1: RJD leader Raghuvansh Prasad Singh during all party pre-budget meeting on July 1, 2009 in Delhi, India. (Photo by Sipra Das/India Today Group/Getty Images)
NEW DELHI, INDIA ? JULY 1: RJD leader Raghuvansh Prasad Singh during all party pre-budget meeting on July 1, 2009 in Delhi, India. (Photo by Sipra Das/India Today Group/Getty Images)

1 COMMENT

  1. जब बुद्ध जैसा अवैदिक महात्मा प्रमाण देता है की वेदानुसार गाय वध्य नहीं थीं तो इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा

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